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Why Indigenous Communities in India Are Fighting for Land Rights | भारत के आदिवासी समुदाय जमीन अधिकारों के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं?

पाँचवीं अनुसूची और आदिवासी स्वशासन: संविधान का वादा (Fifth Schedule and Tribal Self-Governance: Constitutional Promise

पाँचवीं अनुसूची और आदिवासी स्वशासन: संविधान का वादा (Fifth Schedule and Tribal Self-Governance: Constitutional Promise) भारत का संविधान केवल एक क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह देश की आत्मा है। इसमें आदिवासी समाज (Adivasi Community) के लिए विशेष प्रावधान किए गए ताकि उनकी पहचान, संस्कृति और ज़मीन सुरक्षित रहे। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है "पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule)" , जो आदिवासी स्वशासन (Tribal Self-Governance) का आधार मानी जाती है। पाँचवीं अनुसूची क्या है? (What is Fifth Schedule?) पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) भारतीय संविधान का वह प्रावधान है, जो अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) और वहाँ रहने वाले आदिवासी समुदायों के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य है – आदिवासियों की ज़मीन की सुरक्षा उनकी संस्कृति और परंपरा की रक्षा स्थानीय स्तर पर स्वशासन (Self-Governance) शोषण और विस्थापन से बचाव 👉 अंग्रेज़ी में कहें तो: The Fifth Schedule provides special governance for Scheduled Areas and Tribal Communities to safeguard their land, culture,...

Tribal Land Rights and Constitution — आदिवासी भूमि अधिकार और संघर्ष

ऑर्डर कीजिए https://amzn.to/41QlsNQ Tribal Land Rights and Constitution — आदिवासी भूमि अधिकार और संघर्ष प्रस्तावना भारत में आदिवासी समुदायों की भूमि और संसाधनों का अधिकार सिर्फ सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रतिबद्धता भी है। PESA कानून (“Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996”) ने अदिवासियों को उनके पारंपरिक क्षेत्र और सामाजिक संरचना में स्वशासन का अधिकार देने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसकी विवेचना और प्रभाव को समझने के लिए देखिए हमारी ब्लॉग   इस ब्लॉग पोस्ट में हम "Tribal Land Rights and Constitution — आदिवासी भूमि अधिकार और संघर्ष" शीर्षक के अंतर्गत निम्नलिखित विषयों पर चर्चा करेंगे: संविधान में आदिवासियों की भूमि अधिकार की स्थापना PESA कानून की भूमिका और सीमाएँ वास्तविक संघर्ष, न्याय और आज की चुनौतियाँ (विशेषकर झारखंड जैसे राज्यों में) ग्लोबली मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से आदिवासी भूमि अधिकार की वैश्विक प्रासंगिकता 1. संविधान और Scheduled Areas की संकल्पना 1.1 Scheduled Areas और Fifth Schedule भारतीय संवि...