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Why Indigenous Communities in India Are Fighting for Land Rights | भारत के आदिवासी समुदाय जमीन अधिकारों के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं?

Adivasi Land Rights vs Vedanta in Odisha: सच्चाई क्या है?

Adivasi Land Rights vs Vedanta in Odisha: सच्चाई क्या है? भूमिका – जब विकास और अधिकार आमने-सामने हों “Development” और “Rights” — ये दो शब्द अक्सर साथ चलते हैं, लेकिन जब बात आदिवासी इलाकों की आती है, तो ये आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। Odisha, जो प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है, वहां बड़े-बड़े industrial projects आए। इन्हीं में से एक है Vedanta Project , जो खनन (mining) और उद्योग के नाम पर शुरू हुआ। लेकिन सवाल उठता है — 👉 क्या यह विकास सच में “inclusive” है? 👉 या फिर आदिवासियों की जमीन छीनकर corporate को फायदा दिया जा रहा है? Odisha में Vedanta Project क्या है? (Basic Understanding) Vedanta Group भारत की एक बड़ी mining और metals कंपनी है। Odisha के कई जिलों में इसके projects हैं — खासकर जहां bauxite और अन्य खनिज पाए जाते हैं। 🔹  Project के मुख्य उद्देश्य: Mining (खनन) Industrial development Employment creation लेकिन ground reality कुछ और कहानी कहती है…  Adivasi Land Rights – संविधान क्या कहता है? भारत का संविधान आदिवासियों को विशेष अधि...

Madvi Hidma: Kaun Tha? Tribal Rights aur Jal-Jungle-Zameen ki Ladai ka Sach

 Madvi Hidma: Kaun Tha? Tribal Rights aur Jal-Jungle-Zameen ki Ladai ka Sach Aadivasi Samaj ka Sawal: Villain tha Hidma ya Jungle ka Rakshak? 27 states में फैले करोड़ों आदिवासी आज भी अपने जंगल–जन–जमीन के अस्तित्व पर लड़ाई लड़ रहे हैं। और इसी संघर्ष के केंद्र में एक नाम हमेशा विवादों में रहा — Madvi Hidma । Media और government ने उसे India का सबसे खतरनाक Maoist बताया, Core military leader , Many encounters mastermind , लेकिन tribal villages में आज भी लोग whisper करते हैं: “Hidma hamara beta tha… jungle aur izzat ki raksha karne wala.” उनके लिए Hidma सिर्फ एक नाम नहीं, एक सवाल है — “Jab hamare zindagi ka haq cheena jaata hai, to hum kya karein?”  Kaun Tha Madvi Hidma? Kahani jo Media ne Kabhi Sachchai se Nahi Batayi Madvi Hidma का जन्म Bastar के remote गांव में हुआ था, एक ऐसे tribal परिवार में जो जंगल पर निर्भर जीवन जीता था। गांव में school नहीं, अस्पताल नहीं, और ना ही basic facilities। Hidma ने बचपन में देखा...

भारतीय संविधान और आदिवासी अधिकार (Indian Constitution and Tribal Rights): क्या सच में मिला बराबरी का हक़?

अभी खरीदें।     https://amzn.to/3JxLsXM    भारतीय संविधान और आदिवासी अधिकार (Indian Constitution and Tribal Rights): क्या सच में मिला बराबरी का हक़? 🌿 प्रस्तावना (Introduction) भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक दस्तावेज़ है। इसका मकसद सभी नागरिकों को बराबरी, स्वतंत्रता और न्याय दिलाना है। लेकिन सवाल यह है – क्या आदिवासी समाज को सच में संविधान से बराबरी का हक़ मिला है? झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और असम जैसे राज्यों में रहने वाले आदिवासी आज भी विस्थापन, गरीबी, शिक्षा और रोजगार की कमी से जूझ रहे हैं। संविधान ने उनके लिए खास प्रावधान दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कैसी है, यही हम इस ब्लॉग में समझेंगे। 📜  भारतीय संविधान और आदिवासी अधिकार (Indian Constitution and Tribal Rights) 🏛️ अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार (Right to Equality) अनुच्छेद 14 कहता है कि सभी नागरिक कानून की नजर में बराबर हैं। 👉 लेकिन आदिवासी समाज में अभी भी भेदभाव, संसाधनों की कमी और योजनाओं का अभाव देखने को मिलता है। ⚖️ अनुच्छेद 15 – भेदभाव ...